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Sachchi Aur Romanchal Kahaniyan
by Naresh Saxena
गह बदलते ही चीज़ें किस तरह बदल जाती हैं। डिब्बे के भीतर, मुझये सिर्फ चार पाँच इंच दूर हवा गुनगुनी थी। बिस्तर था, कम्बल था और मैं बाहर सिर्फ पाज़ामा कुर्ता पहने रेल के दरवाज़े से लटका ठण्ड से सिहर रहा था। सिर्फ चार इंच की दूरी ने जीवन को मौत की और धकेल दिया था। और ये चार इंच पार करना असंभव था। ……………इस संकलन में नामचीन कवि नरेश सक्सेना के जीवन की सच्ची और रोमांच से भरी कहानियाँ हैं। इनमें जिजीविषा, साहस और बूझ भी है। ई की मात्रा हाथ में ई लग जाये तो हाथी हो जाता है। ज़रा सी आवाज़ बदल जाये तो शब्द का अर्थ बदल जाता है। हमारी भाषाएँ ध्वनियों का खेल है। ज़रा कल्पना कीजिये ई की मात्रा का असर भाषा से जि़न्दगी में चला आये तो क्या होगाॽ इस कहानी में इसके मज़ेदार प्रसंग हैं कि ई की मात्रा लग जाए तो वह कैसे-कैसे सितम ढा सकती है। ISBN - 9788197032738
- Age
- 3–15
- Language
- Hindi
- Pages
- 48
- Publisher
- Ektara Trust; 1st edition
- Reading level
- Medium
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